Chickpea Variety
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Chickpea Variety: चने की किस्म, 1 एकड़ मे 15 क्विंटल उत्पादन के साथ देशी, काबुली और डॉलर चने की उन्नत किस्मे, जानें सम्पूर्ण जानकारी।  

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कृषि ब्लॉग: फसल समस्या समाधान | Agriculture Blog in Hindi

चना (Chickpea) भारतीय कृषि की प्रमुख दलहन फसलों में से एक है। भारत में चना का उत्पादन बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है, खासकर रबी मौसम में। यह न सिर्फ प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, बल्कि मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने में भी मदद करता है। चने की खेती (Bengal Gram Crop) के लिए उपयुक्त जलवायु और उन्नत किस्मों का चयन, किसानों के लिए अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफे का आधार होता है। 

Farmer Phone Company (Farmerphone.Com) के माध्यम से इस ब्लॉग में हम जानेंगे प्रति एकड़ ज्यादा उत्पादन देने वाली चने की किस्म बेस्ट किस्म (Top 10 Chickpea Variety Information in Hindi) के साथ देशी, काबुली, और डॉलर चने की उन्नत किस्मों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी।


सबसे ज्यादा भारत में चने की खेती (Chickpea Crop Cultivation in India)

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चना उत्पादक देश है। मुख्य रूप से चना की खेती उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में की जाती है। भारतीय चना उत्पादन में देशी चना और काबुली चना दोनों का बड़ा योगदान है। चने की खेती के लिए 15°C से 25°C तापमान और कम वर्षा वाले क्षेत्र सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। मिट्टी की अच्छी जल निकासी और हल्की दोमट मिट्टी चने की खेती के लिए सबसे बेहतर होती है।


टॉप 10 चने की किस्म (Top 10 Chickpea Varieties in India)

चना एक महत्वपूर्ण फसल है जो भारत की कृषि में एक अहम भूमिका निभाती है। इसके विभिन्न प्रकारों जैसे देशी चना, काबुली चना और डॉलर चना की विशेषताएँ और उन्नत किस्में किसानों को बेहतर उपज और मुनाफा देने में सहायक होती हैं। सही किस्म का चयन, उन्नत तकनीक, और उचित कृषि प्रबंधन के साथ चने की खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। चने की कम लागत मे ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म निम्न है – 

दफ्तरी 21 चने की किस्म (Daftari 21 Gram Variety) 

यह चना अधिक शाखाओं वाले पौधों के लिए जाना जाता है और सभी प्रकार की मिट्टी के लिए उपयुक्त है। यह बारानी और सिंचित दोनों अवस्थाओं में अच्छी तरह उगता है। यह उच्च उपज वाली किस्म है, जिससे अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यह उखटारोग के प्रति सहनशील है।


अंकुर चिराग चने की किस्म (Ankur Chirag Gram Variety)

यह चना उकठा रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता रखता है। इसकी बुवाई रबी मौसम में, अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक की जाती है, और ड्रिलिंग विधि से बुवाई की जाती है। बुवाई की दूरी पंक्ति से पंक्ति 30 सेमी और पौधों से पौधों की 10 सेमी होती है। इसमें मध्यम मोटे, पीले-भूरे रंग के दाने होते हैं और इसका अनाज गुणवत्ता में बहुत अच्छा होता है। हरे बीज स्वाद में मीठे होते हैं।


वेस्टर्न प्रताप चने की किस्म (Western Pratap Gram Variety) 

यह चना सितम्बर के अंत से अक्टूबर तक बोया जाता है। बुवाई की विधि चोबना, ओरणी या प्रसारण है, और इसे 30 x 10 सेमी की दूरी पर बोया जाता है। यह मध्यम परिपक्वता वाली फसल है, जिसकी अवधि 90-95 दिन होती है।


ईगल जाकी-9218 चने की किस्म (Eagle Jaki-9218 Chickpea Variety)

यह रबी मौसम में बोया जाता है, और इसकी बुवाई ड्रिलिंग विधि से की जाती है। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी और पौधें से पौधें की दूरी 10 सेमी रखी जाती है। यह एक उच्च उपज वाली किस्म है, जिसमें बोल्ड और एकसमान आकार के बीज होते हैं।


महिको विजय चने की किस्म (Mahyco Vijay Chickpea Variety) 

यह किस्म उखटा रोग के प्रति प्रतिरोधी है और रबी में बोई जाती है। बुवाई की पद्धति भी ड्रिलिंग द्वारा होती है, जिसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी और पौधें से पौधें की दूरी 10 सेमी होती है। यह एक उच्च उपज वाली किस्म है और जल तनाव की स्थिति के प्रति सहिष्णु होती है, जिससे पौधे अधिक शाखाओं में विकसित हो सकते हैं, जिससे इसकी उपज बढ़ती है।


दफ्तरी 11 चने की किस्म (Daftari 11 Bengal Gram Variety)

चने दफ्तारी 11 एक उच्च गुणवत्ता वाली चने की किस्म है जो लंबी पौधों वाली होती है। यह हल्की और भारी मिट्टी दोनों में उगाई जा सकती है, जिससे यह विभिन्न प्रकार की कृषि परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है। इस किस्म को बारिश पर निर्भर और सिंचाई वाले दोनों क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। इसके अलावा, यह उखटा रोग (Wilt Disease) के प्रति सहिष्णु है, जिससे फसल की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। चने दफ्तारी 11 उच्च उपज देने वाली किस्म है, जो किसानों के लिए लाभकारी और फायदेमंद है।


अंकुर विजय चने की किस्म (Ankur Vijay Chickpea Variety)

अंकुर विजय चना एक उत्कृष्ट किस्म है जो जल्दी पकने वाली होती है। यह बौनी फैलने वाली पौधों की श्रेणी में आती है, जिसकी ऊंचाई 25-30 सेंटीमीटर होती है। यह किस्म 90-108 दिनों में परिपक्वता प्राप्त करती है। इसके बीज मध्यम मोटाई के होते हैं और पीले-भूरे रंग के, जो कि हल्के झुर्रीदार होते हैं। अंकुर विजय चना की खेती करने से न केवल उच्च उपज मिलती है, बल्कि यह विभिन्न मिट्टी की स्थिति में भी अच्छे से उगती है। यह किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प है जो उनके उत्पादन को बढ़ाने में मदद कर सकता है।


बॉम्बे GUJ-2 काबुली चना (Bombay GUJ-2 Kabuli Chana Variety)

बॉम्बे GUJ-2 काबुली चना एक उच्च गुणवत्ता वाली चने की किस्म है। इसे सितंबर से अक्टूबर के बीच बोया जाता है। प्रति एकड़ बीज दर 45-50 किलोग्राम होती है। इसका पकने का समय 90 से 100 दिनों का होता है। पौधे की पत्तियाँ हरी होती हैं और दाने का रंग गहरा पीला होता है। प्रत्येक फली में 1 से 2 दाने होते हैं। पौधे की ऊंचाई लगभग 25 से 30 सेंटीमीटर तक होती है। प्रति एकड़ उत्पादन लगभग 1000 से 1200 किलोग्राम तक हो सकता है। यह किस्म उच्च उपज और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है।


बॉम्बे दिग्विजय चने का बीज (Bombay Digvijay Gram Seed Variety)

बॉम्बे दिग्विजय चना बीज (Digvijay Checkpea seeds) एक उन्नत किस्म है, जिसे सितंबर से अक्टूबर के बीच बोया जाता है। प्रति एकड़ बीज दर 45-50 किलोग्राम होती है। यह किस्म लगभग 90-100 दिनों में पक जाती है। इसके पौधे की ऊंचाई 25 से 30 इंच तक होती है और पत्तियों का रंग हरा होता है। दाने का रंग गहरा पीला होता है और प्रति फली में लगभग 2 दाने होते हैं। यह किस्म प्रति एकड़ 1000 से 1200 किलोग्राम की अच्छी उपज देती है, जिससे किसानों को उच्च उत्पादन प्राप्त होता है।


बॉम्बे आभार चने के बीज (Bombay Aabhar Chickpea Seeds  Variety)

बॉम्बे आभार चने के बीज (Aabhar – White Gold) उच्च गुणवत्ता वाले ग्राम बीज हैं, जो सितम्बर से अक्टूबर के बीच बोए जाते हैं। प्रति एकड़ बीज दर 55 से 60 किलोग्राम होती है। इन बीजों से पौधे की ऊँचाई लगभग 24 से 30 इंच तक होती है, और फसल 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। पौधों की पत्तियाँ हरे रंग की होती हैं, और दाने मिल्की व्हाइट सुपर गोल्ड रंग के होते हैं। प्रति फली में लगभग 2 दाने होते हैं, और प्रति एकड़ उत्पादन 1000 से 1200 किलोग्राम तक हो सकता है।


देशी चने की जानकारी (Desi Chickpea Information) 

देशी चना (Desi Chickpea) भारत में सबसे ज्यादा उगाया जाता है और इसका उपयोग मुख्य रूप से दाल के रूप में किया जाता है। देशी चने के बीज छोटे, कठोर और भूरे रंग के होते हैं। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जो इसे पोषण के दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण बनाता है। देशी चने की विभिन्न किस्में हैं, जिनमें से कुछ उन्नत किस्में अधिक उत्पादन क्षमता और रोग प्रतिरोधकता के लिए प्रसिद्ध हैं।

देशी चने की 10 उन्नत किस्में (10 improved varieties of Desi Bengal Gram)

  1. JG 11: मध्य प्रदेश में लोकप्रिय, उच्च उपज वाली और सूखा प्रतिरोधी किस्म।
  2. PUSA 362: यह किस्म अच्छी उत्पादन क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है।
  3. Vishal: महाराष्ट्र में उगाई जाने वाली उच्च उपज वाली किस्म।
  4. Annegiri: कर्नाटक में उगाई जाने वाली उच्च उत्पादन वाली किस्म।
  5. GNG 1958: राजस्थान में सूखा प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली किस्म।
  6. KAK 2: यह किस्म सूखा प्रतिरोधी है और मध्य प्रदेश में अधिक उपज देती है।
  7. JAKI 9218: यह जल्दी पकने वाली किस्म है और अधिक उत्पादन देती है।
  8. PUSA 547: यह किस्म अच्छी गुणवत्ता के साथ अधिक उपज देती है।
  9. ICC 4958: सूखा सहनशील किस्म और अच्छी पैदावार के लिए जानी जाती है।
  10. JG 16: यह किस्म भी सूखा प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली है।

काबुली चने की जानकारी (Kabuli Chickpeas Information) 

काबुली चना (Kabuli Chickpea) सफेद और बड़े आकार का होता है, जिसे मुख्य रूप से सलाद, छोले, और स्नैक्स के रूप में उपयोग किया जाता है। इसका आकार और गुणवत्ता इसे व्यावसायिक दृष्टिकोण से लाभदायक बनाते हैं। काबुली चने की खेती मुख्यतः उत्तर भारत, मध्य प्रदेश और राजस्थान में की जाती है। इसकी किस्में प्रीमियम ग्रेड की होती हैं और बाजार में इसका अच्छा मूल्य मिलता है।

काबुली चने की 10 उन्नत किस्में (Improved Hybrid Varieties of Chickpea)

  1. PUSA 1003: अधिक उत्पादन और रोग प्रतिरोधी क्षमता वाली किस्म।
  2. KAK-2: यह किस्म अच्छी पैदावार और सूखा प्रतिरोधी क्षमता के लिए जानी जाती है।
  3. Shubhra: राजस्थान में उगाई जाने वाली एक उच्च उपज वाली किस्म।
  4. HC 5: यह हरियाणा में प्रसिद्ध है और बड़ी बीजों के लिए उगाई जाती है।
  5. Super Nafa: यह किस्म बड़े बीज और उच्च पैदावार के लिए जानी जाती है।
  6. BG 1053: यह मध्य प्रदेश में लोकप्रिय है और अधिक उपज देती है।
  7. GJG 0705: गुजरात में उगाई जाने वाली सूखा प्रतिरोधी और उच्च उपज देने वाली किस्म।
  8. PKV Kabuli 2: यह किस्म महाराष्ट्र में लोकप्रिय है और उच्च उत्पादन देती है।
  9. Pant G 186: उत्तर प्रदेश में उगाई जाने वाली एक उन्नत किस्म।
  10. GNG 1581: यह किस्म राजस्थान में उगाई जाती है और बड़े बीजों के लिए प्रसिद्ध है।

डॉलर चने की जानकारी (Dollar Chickpea Information

डॉलर चना (Dollar Chickpea) काबुली चने का एक प्रीमियम संस्करण माना जाता है। इसका आकार काबुली चने से भी बड़ा होता है और इसका उपयोग विशेष रूप से निर्यात के लिए किया जाता है। डॉलर चने की खेती मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में की जाती है। इसकी किस्में उच्च गुणवत्ता की होती हैं और इनका बाजार मूल्य भी अधिक होता है।

डॉलर चने की 10 उन्नत किस्में (Top 10 Dollar Chickpea Variety)

  1. Dollar 124: यह किस्म बड़ी और सफेद बीज वाली होती है।
  2. MPKV Dollar: यह महाराष्ट्र में उगाई जाने वाली एक प्रमुख किस्म है।
  3. JGK 912: मध्य प्रदेश में उगाई जाने वाली उन्नत किस्म।
  4. Super Dollar: यह किस्म बड़े बीज और उच्च पैदावार के लिए जानी जाती है।
  5. BG 105: इस किस्म की बीज बड़ी होती है और यह अधिक उपज देती है।
  6. PUSA Dollar: दिल्ली में उगाई जाने वाली प्रीमियम गुणवत्ता की किस्म।
  7. Jumbo Dollar: यह किस्म विशेष रूप से निर्यात के लिए उगाई जाती है।
  8. Maharani Dollar: बड़ी बीज और उच्च पैदावार के लिए जानी जाती है।
  9. RSG Dollar: राजस्थान में उगाई जाने वाली एक उन्नत किस्म।
  10. Pusa K 4: यह किस्म मध्य प्रदेश में लोकप्रिय है और उच्च उपज देती है।

लाल चने की जानकारी (Red Chickpeas Information)

लाल चना (Red Chickpea) मुख्यतः हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में उगाया जाता है। इसका रंग लाल होता है और इसे पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है। लाल चने की खेती कम मात्रा में होती है, लेकिन इसका पोषण मूल्य और बाजार में मांग अच्छी होती है।

सफेद चने की जानकारी (White  Chickpeas Information)

सफेद चना (White Chickpea) विशेष रूप से पश्चिमी भारत में उगाया जाता है। यह सामान्यतः छोटे आकार का होता है और इसका उपयोग स्नैक्स और सलाद में किया जाता है। इसका उत्पादन सीमित क्षेत्रों में होता है लेकिन इसकी मांग अच्छी होती है।


सारांश:

चना की खेती भारतीय किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण फसल है, और इसमें उन्नत किस्मों का चयन उत्पादन को बेहतर बना सकता है। देशी, काबुली और डॉलर चने की उन्नत किस्में किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता, और निर्यात के लिए उपयुक्तता प्रदान करती हैं। चने की किस्मों का सही चयन और उचित कृषि तकनीकों का प्रयोग किसानों के लिए अधिक मुनाफा और समृद्धि सुनिश्चित कर सकता है।


अक्सर पूछे जानें वाले प्रश्न: 

प्रश्न – चना की खेती किन प्रमुख राज्यों में की जाती है?
उत्तर – उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, और आंध्र प्रदेश में प्रमुखता से चना उगाया जाता है।

प्रश्न – चना की कौन-सी किस्में भारत में उगाई जाती हैं?
उत्तर – भारत में देशी चना, काबुली चना और डॉलर चना की किस्में उगाई जाती हैं।

प्रश्न – चने की कौन-सी किस्में सूखा प्रतिरोधी होती हैं?
उत्तर – JG 11 और ICC 4958 जैसी किस्में सूखा प्रतिरोधी होती हैं।

प्रश्न – काबुली चना क्या होता है?
उत्तर – काबुली चना सफेद और बड़े दाने वाला होता है, जिसका उपयोग सलाद और स्नैक्स में किया जाता है।

प्रश्न – डॉलर चना क्या होता है?
उत्तर – डॉलर चना काबुली चने का प्रीमियम संस्करण है, जो आकार में बड़ा और निर्यात के लिए उपयुक्त होता है।

प्रश्न – चना के प्रमुख रोग कौन से हैं?
उत्तर – उखटा रोग (Wilt Disease) और उखटा जैसी समस्याएं चने की प्रमुख रोगों में शामिल हैं।

प्रश्न – चना की कौन-सी किस्म उखटा रोग के प्रति प्रतिरोधी है?
उत्तर – अंकुर चिराग और महिको विजय जैसी किस्में उखटा रोग के प्रति प्रतिरोधी होती हैं।

प्रश्न – चना की कौन-सी किस्में जल्दी पकने वाली होती हैं?
उत्तर – JAKI 9218 और अंकुर विजय जैसी किस्में जल्दी पकने वाली होती हैं।

प्रश्न – काबुली चने की प्रमुख उन्नत किस्में कौन-सी हैं?
उत्तर – PUSA 1003, HC 5, और GNG 1581 काबुली चने की उन्नत किस्में हैं।

प्रश्न – चने की खेती में प्रति एकड़ बीज दर कितनी होती है?
उत्तर – चने की खेती में प्रति एकड़ बीज दर 45-50 किलोग्राम होती है।

प्रश्न – चने की कौन-सी किस्म उच्च उपज देती है?
उत्तर – बॉम्बे GUJ-2 और सुपर नाफा जैसी किस्में उच्च उपज देने वाली हैं।

प्रश्न – चने की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?
उत्तर – चने की सबसे अच्छी किस्म “विशाल” मानी जाती है।

प्रश्न – चना की कितनी वैरायटी है?
उत्तर – चने की कई वैरायटी हैं, जिनमें प्रमुख हैं- काबुली चना, काले चना, और हरे चना।

प्रश्न – चना कितने प्रकार का होता है?
उत्तर – चना मुख्यतः दो प्रकार का होता है: काबुली चना और desi चना।

प्रश्न – कौन सा चना अच्छा है?
उत्तर – “काबुली चना” अच्छा होता है क्योंकि यह स्वादिष्ट और प्रोटीन में समृद्ध है।

प्रश्न – डॉलर चने की उन्नत किस्म कौनसी है?
उत्तर – “डॉलर चना” की उन्नत किस्म “नागालैंड” मानी जाती है।

प्रश्न – 1 बीघा में कितना चना बोया जाता है?
उत्तर – 1 बीघा में लगभग 25-30 किलोग्राम चना बोया जाता है।

प्रश्न – चने की बुवाई कौन से महीने में करनी चाहिए?
उत्तर – चने की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच करनी चाहिए।

प्रश्न – विशाल चना कितने दिन में पक जाता है?
उत्तर – विशाल चना लगभग 100-120 दिनों में पक जाता है।

प्रश्न – मध्यप्रदेश की चने की उन्नत किस्में की जानकारी?
उत्तर – मध्यप्रदेश की उन्नत किस्में “कबली”, “दफ्तरी 21”, और “पूसा मानव” हैं।

प्रश्न – राजस्थान की चने की उन्नत किस्में की जानकारी?
उत्तर – राजस्थान में उन्नत किस्में “पंचम”, “शाही चना”, और “काबुली चना” हैं।

प्रश्न – 202 चना की वैरायटी की जानकारी?
उत्तर – 202 चना की वैरायटी विशेष रूप से ताजगी और उच्च उत्पादन के लिए जानी जाती है।

प्रश्न – फुले 9425-5 चना की जानकारी?
उत्तर – फुले 9425-5 चना उन्नत किस्म है, जो सूखे और उच्च तापमान के प्रति सहनशील है।

प्रश्न – दफ्तरी 21 चना बीज की जानकारी?
उत्तर – दफ्तरी 21 चना बीज उच्च उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न – पूसा मानव चना की जानकारी?
उत्तर – पूसा मानव चना उच्च प्रोटीन और उच्च पैदावार देने वाली किस्म है।

प्रश्न – देशी चने की कौन सी किस्म सूखा प्रतिरोधी है?
उत्तर – JG 11, GNG 1958, और ICC 4958 सूखा प्रतिरोधी देशी चने की किस्में हैं।


Author –

Durgaprasad Kewte

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