सोयाबीन की बेस्ट किस्म Top 10 Soybean Variety Information
सोयाबीन (Glycine max) खरीफ की प्रमुख फसल है, जो प्रोटीन व तेल का उत्कृष्ट स्रोत है। भारत में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश में सोयाबीन की सबसे अधिक खेती होती है। खेती की सफलता कृषि योग्य क्षेत्र, फसल प्रबंधन, सिंचाई व उर्वरक उपयोग के साथ-साथ सही वैरायटी (किस्म) के चयन पर भी निर्भर करती है। 2025 में बाज़ार व मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसी 10 प्रमुख सोयाबीन किस्मों की (Top 10 Soybean Variety Information) जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं, जो उच्च उत्पादन, जल्दी पकने वाली अवधि व रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए स्वयं सिद्ध हैं।
सोयाबीन वैरायटी चयन के मुख्य कारक
- रोग-प्रतिरोधक क्षमता
- फ्रॉग आई, लीफ स्पॉट, चारकोल रोट, एरियल लीफ ब्लाइट आदि प्रमुख रोगों से बचाव
- उच्च प्रतिरोधकता वाली किस्में खराब मौसम में भी उपज बनाए रखती हैं
- पकने की अवधि (Days to Maturity)
- 90–110 दिन में पकने वाली किस्में कृषक वर्ग में लोकप्रिय
- 120 दिन से अधिक न हो, ताकि खरीफ मौसम में कटाई समय पर हो सके
- उत्पादन क्षमता
- न्यूनतम 8 क्विंटल/एकड़ से ऊपर का आदर्श उत्पादन
- मध्यम से उच्च उपज देने वाली किस्मों को प्राथमिकता
- बीज दर व पौध संरचना
- 20–40 किलो प्रमाणित बीज प्रति एकड़
- पौधे की लंबाई व फली जमीन से ऊँचाई पर होना चाहिए, ताकि मैकेनिकल कटाई आसान हो
- क्षेत्रानुसार सिफारिश
- हर राज्य की मिट्टी व मौसम के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन
- स्थानीय कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा अनुशंसित वैरायटी
2025 की टॉप 10 सोयाबीन किस्में
1. JS 2303 सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद)
- पकने का समय: 93 दिन
- उत्पादन क्षमता: 70–80 फलियां प्रति पौधा; 8–10 क्विंटल/एकड़
- बीज दर: 30 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- उच्च रोग-प्रतिरोधक (लीफ स्पॉट, चारकोल रोट)
- दमकदार दाने, तीन दाने प्रति फल
- मजबूत तना व मेकॅनिकल कटाई के अनुकूल
JS 2303 की व्यापक लोकप्रियता इसका कम समय में पक जाना व सीमित बीज दर में उच्च उत्पादन देने की क्षमता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व गुजरात में इसका विस्तार हो रहा है।

2. KDS 726 (फुले संगम) सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र
- पकने का समय: 110–115 दिन
- उत्पादन: 15–18 क्विंटल/एकड़
- बीज दर: 25 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- आगाऊ बीमारी (‘तांबरा रोग’, लीफ स्पॉट) के प्रति अच्छी सहनशीलता
- फैलने वाली संरचना, उन्नत पोषण अवशोषण
- दक्षिण भारत व महाराष्ट्र के लिए उपयुक्त
यह किस्म वृष्टिहीन परिस्थितियों में भी संतोषजनक पैदावार देती है। तेल की मात्रा औसतन 18.4% व प्रोटीन 40–42% रहती है।

3. JS 9560 सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: ICAR
- पकने का समय: 95 दिन
- उत्पादन: 12–14 क्विंटल/एकड़
- बीज दर: 30 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- मध्यम रोग-प्रतिरोधक, विश्वसनीय पुरानी किस्म
- बैंगनी फूल व पीले बीज
- 80–85 दिनों में कटाई के लिए तैयार
पुरानी किन्तु भरोसेमंद किस्म, जो सीमित क्षेत्र में स्थिर उपज देती है।

4. RVSM 1135 सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (RAU)
- पकने का समय: 105 दिन
- उत्पादन: 14–15 क्विंटल/एकड़
- बीज दर: 20–25 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- अर्ली मैच्योरिंग, समय पर कटाई में सहायता
- चारकोल रोट, लीफ ब्लाइट प्रतिरोधी
- बम्पर पैदावार के लिए उपयुक्त
मध्य प्रदेश, राजस्थान व गुजरात के खरीफ क्षेत्रों में भरोसेमंद प्रदर्शन करने वाली किस्म।

5. NRC 150 सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर सोयाबीन, भोपाल
- पकने का समय: 100–110 दिन
- उत्पादन: 16–18 क्विंटल/एकड़
- बीज दर: 30 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- सफेद फूल व उच्च पोषक तत्व
- JS 9560 से बेहतर पैदावार व गुणवत्ता
- प्रोटीन 42–44%, तेल 19–20%
विशेषज्ञों की माने तो, इस किस्म का पोषण मूल्य व तेल प्रतिशत बाजार मांग के अनुरूप है।

6. JS 2034 सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: ICAR
- पकने का समय: 80–85 दिन
- उत्पादन: 24–25 क्विंटल/हेक्टेयर (24–25 क्विंटल/एकड़)
- बीज दर: 30–35 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- कम वर्षा पर भी उच्च उत्पादन
- पीले बीज व सफेद फूल
- खरीफ की शुरुआती बुवाई (15–30 जून) के लिए उपयुक्त
पूर्वोत्तर व छत्तीसगढ़ जैसे वृष्टि-आश्रित क्षेत्रों में भी सफल।

7. BS 6124 सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: ICAR-श्यामल
- पकने का समय: 90–95 दिन
- उत्पादन: 20–25 क्विंटल/एकड़
- बीज दर: 35–40 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- बैंगनी फूल, लंबे पत्ते
- 90–95 दिन में प्रभारी पकना
- ठोस तना व कम झड़ने वाली फली
नए किसानों व सीमित संसाधनों वाले खेतों के लिए स्थिर विकल्प।

8. Pratap Soya-45 (RKS-45) सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: RAU, अहमदाबाद
- पकने का समय: 90–98 दिन
- उत्पादन: 30–35 क्विंटल/हेक्टेयर
- बीज दर: 30–35 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- तेल 21%, प्रोटीन 40–41%
- यलो मोजेक वायरस, स्टेम फ्लाई प्रतिरोधी
- राजस्थान व सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
कोटिंग व सींचित दोनों स्थितियों में उपयोगी, उर्वरक प्रतिक्रिया अच्छी।

9. JS 2069 सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: ICAR
- पकने का समय: 85–86 दिन
- उत्पादन: 22–26 क्विंटल/एकड़
- बीज दर: 40 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- जल्दी पकने वाली (85 दिन)
- मजबूत दाने, बैंगनी फूल
- मध्यम वर्षा क्षेत्रों के लिए सही
किसानों को हार्वेस्ट जल्दी शुरू करने में मददगार।

10. MAUS 81 (शक्ति) सोयाबीन की किस्म
- विकासकर्ता: MAU, महाराष्ट्र
- पकने का समय: 93–97 दिन
- उत्पादन: 33–35 क्विंटल/एकड़
- बीज दर: 30–35 किलो/एकड़
- मुख्य विशेषताएँ:
- तेल 20.5%, प्रोटीन 41.5%
- गहरे हरे पत्ते, पीले आयताकार बीज
- मध्य क्षेत्र (MP, Gujarat) के लिए उपयुक्त
इस किस्म ने स्थिर पैदावार व बाजार गुणकों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

सोयाबीन खेती के सुझाव (Best Soybean Practices)
- प्रमाणित बीज का प्रयोग
- 100% सर्टिफाइड बीज सुनिश्चित करें
- दो-तीन वैरायटीज का मिश्रण करके जोखिम कम करें
- सही बुवाई समय
- ज्यादातर क्षेत्र: 15 जून से 30 जून तक
- जल्दी पकने वाली किस्में पहले बुवाई के लिए
- नियमित फसल निरीक्षण
- रोग-कीट प्रबंधन हेतु पारंपरिक व जैविक द्रव्य का समय पर छिड़काव
- निष्फल पत्तियों व कचरे को खेत से हटा दें
- सिंचाई व उर्वरक प्रबंधन
- फूल आंवधि एवं फली बनने के दौरान उर्वरक अनुपात पर ध्यान
- जरूरत के अनुसार द्वितीय सिंचाई
- कटाई तकनीक
- पौधे की लंबाई व फली ऊँचाई को ध्यान में रखते हुए मेकॅनिकल या हाथ से कटाई
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- सबसे बेहतरीन सोयाबीन किस्म कौन सी है?
JS 2303 व KDS 726 (फुले संगम) को 2025 के लिए उच्च उत्पादन व रोग-प्रतिरोधक क्षमता के कारण अग्रणी माना गया है। - 1 एकड़ में सोयाबीन की बीज दर कितनी होनी चाहिए?
क्षेत्र व किस्म के अनुसार 30–40 किलो प्रति एकड़ प्रमाणित बीज पर्याप्त रहता है। - सोयाबीन की कितनी किस्में उपलब्ध हैं?
भारत में लगभग 10–12 प्रमुख प्रमाणित किस्में हैं, जिनमें से 10 टॉप वरीयता वाली किस्मों में शामिल हैं। - वृष्टि-आश्रित क्षेत्रों के लिए कौन सी किस्म उचित है?
JS 2034, MACS 1407 व MAUS 81 वृष्टि-आश्रित आधुनिक किस्मों में श्रेष्ठ मानी जाती हैं। - सोयाबीन में पोषक तत्व कौन-कौन से होते हैं?
प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन E, B-कॉम्प्लेक्स, आयरन, अमीनो एसिड इत्यादि। - मार्केटिंग व सेलिंग टिप्स?
- सीधे तेल मिलों से संपर्क
- सोयाबीन डेरिवेटिव्स (टोफू, सोया मिल्क) निर्माताओं को बेचें
निष्कर्ष
2025 में सोयाबीन की खेती का अधिकतम लाभ उठाने के लिए सही वैरायटी का चयन अति आवश्यक है। JS 2303, KDS 726, NRC 150 जैसी किस्में उच्च उत्पादन, जल्दी पकने व रोग-प्रतिरोधक क्षमता में श्रेष्ठ योगदान देती हैं। क्षेत्रानुसार स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित किस्मों का चयन करें, प्रमाणित बीज व उचित फसल प्रबंधन से खरीफ मौसम में बम्पर पैदावार प्राप्त करें।
अधिक जानकारी व अपडेट के लिए, अपने नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें।






